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माँ सरस्वती वंदना

जो रस भाषा और छंद की अधिष्ठातृ देवता हैं! ग्यानी विग्यानी और कविकुल जिनके चरण सेवता है!! ब्रह्मदेव की जो शक्ति हैं शुभ्र वस्त्र धारिणी हैं! वीणा की झंकार सुनानेवाली कमलवासिनी हैं!! हे मांवीणापाणि!केवल विद्या का आशीष मिले! भारत माती की यशगाथा गाने की बस भीख मिले!!.....वंदेमातरम.