दादरी की आग.... सियासत की रोटी

दिल्ली से सटे दादरी के बिसहाड़ा गांव में जो कुछ हुआ.... उसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे....दादरी के बिसहाड़ा में इंसान रुपी भेड़ियों ने... 52 साल के अख़लाक़ को महज एक अफवाह के कारण मौत के घाट उतार दिया.... इलाके में बीफ पर ऐसा बवाल मचा... कि अखलाक को भीड़ ने उसके घर से घसीटकर....,बेरहमी की सारी हदे पार कर दी....और अखलाक के मासूम बच्चों के सामने मौत की लकीर खीच दी गई....वो बच्चे अपने पिता के मौत का तमाशा देखते रहे....विलखते रहे... रोते रहे.... रहम की भीख मांगते रहे..... लेकिन नफरत की आग में झुलस रही भीड़ ने....अखलाक को मौत के मुंह में उतार कर ही दम लिया....और अखलाक के मौत के साथ ही शुरू हो गई सियासत.... इस घटना के बाद राजनीतिक दलों को एक नया मुद्दा मिल गया.... सियासी रोटियां सेकने में....सियासी दलों ने ज्यादा देर किए बगैर... एक-दूसरे आरोप मड़ना शुरू कर दिया....और खुद को धर्म-निरपेक्ष बताने में जुट गए... आलम ये है कि... एक-एक कर सभी पार्टियां दादरी में... पीड़ित परिवार से मिलने आ रहे है.... और खुद को धर्म-निरपेक्ष बताते हुए.... अल्पसंख्यकों का मसीहा बता रहे हैं.... राहुल गांधी से केजरीवाल तक....सभी पीड़ित परिवार के जख्म पर मरहम लगाने पहुंचे...... मामले पर सियासत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि... कोई इसे हादसा बता रहा है... तो कोई इसे हत्या बता रहा है ....पीड़ित परिवार दर्द से कराह रहा हैं.... मुआवजे की राशि 20 लाख से बढ़ाकर.... 50 लाख या करोड़ कर दी जाए...तो भी शायद परिवार का दर्द कम ना हो....क्येंकि मासूम बच्चों को पैसे नहीं.... उनके अब्बु चाहिए....जो अब इस दुनिया में नहीं रहे.....अब्बु के प्यार के सामने.... पैसे का कोई मोल नहीं....लेकिन सियासी रोटियां सेकने में मग्न....इन नेताओँ को इससे क्या..... उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता....कि किसकी मौत हो रही हैं.... और कौन इंसाफ के लिए तड़प रहा है.....उन्हें तो बस राजनीति करनी है....एक-दूसरे पर आरोप लगाने हैं....जो वो कर रहे है.... लेकिन जिसे समझना है.... वो इसे जरुर समझे....इस बात को ध्यान में रखे....कि साम्प्रादायिकता जह़र है.... और सिर्फ जह़र.....