शुक्रिया सहवाग...

शुक्रिया सहवाग...

104 टेस्ट मैच में 8,586 रन..... 251 एकदिवसीय मैचों में 8,273 रन.... टेस्ट क्रिकेट में 23 और वनडे क्रिकेट में 15 शतक और टेस्ट में दो बार तीहरा शतक बनाने वाले विस्फोटक बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया..... काश.... इस विस्फोटक बल्लेबाज का सन्यास भी विस्फोटक होता.... धूम-धड़ाके वाला होता.... ठीक वैसा ही.... जैसे मैदान पर आने के बाद.... सहवाग क्रिकेट के मैदान को.... युद्ध का मैदान बना देते थे.... और अपने तोप यानि बल्ले से गेंदबाजों के लिए कहर बरपाते थे...... वाकई में सहवाग का कायल कौन नहीं है.... कौन उन्हें बल्लेबाजी करते नहीं देखना चाहेगा.....सच कहूं तो....ये लाइने लिखते हुए.... बहुत दुख हो रहा है.....दुख  की सीमा ठीक वैसा ही है.... जब सचिन ने वानखेडे में सन्यास लिया था..... और पूरा देश गम में समा गया था..... आज ये सब लिखते हुए.... मेरी भी आंखे नम हो रही है.....क्या करूं सहवाग का फैन जो हूं.... आप लोगों की तरह.....बार-बार एक ही खयाल मन में आ रहा है.... अब सहवाग को बल्लेबाजी करते हुए नहीं देख सकता.... उस जज्बे को नहीं देख सकता.... क्रिकेट के मैदान पर उस तूफान को नहीं देख सकता.....काश ---दो तीन साल और सहवाग खेल जाते.... काश टीम में एक बार फिर उनका चयन हो जाता..... लेकिन अफसोस कि ये वक्त किसी का नहीं.....और ये वक्त अब सहवाग का नहीं है..... ये वक्त कभी सहवाग का था..... तभी तो हम सब उनके कायल हो गए.... फैन बन गए..... लेकिन ये वक्त ही है.... जो अब इसे अलग कर रहा है......किसी के जाने से कुछ रुकता नहीं..... सहवाग के नहीं रहने से भारतीय टीम को भी कोई नुकसान नहीं,,,, लेकिन हां.... एक बात जरूर कहूंगा..... सहवाग आप यूनिक हो.... अलग हो.... बेमिसाल हो .... लाजवाब हो..... और शायद ही कोई और होगा.... जो क्रिकेट के मैदान पर.... उस अंदाज को दोहराएगा.... जो सहवाग ने किया.... वो बेखौफ अंदाज.... ग्लेन मेक्ग्रा हो.... या शोएब अख्तर.... या वसीम अकरम.... मुरलीधरन हो..... या शेन वार्न.... सबकी धूनाई....मेलबर्न के तेज विकेट पर.... 195 रनों की पारी को कौन भूल सकता है.... भारतीय क्रिकेट में अहम योगदान के लिए.... वीरेंद्र सहवाग को तहे दिल से शुक्रिया कहता हूं..... थैंक्यू सहवाग....