पाटलिपुत्र में किसकी होगी जीत...?

पाटलिपुत्र में किसकी होगी जीत...?

पिछले दस सालों से नीतीश कुमार का बिहार के सत्ता पर अधिकार रहा है.... लेकिन 2015 का चुनाव के बाद.... नीतीश के हाथ में सत्ता रहेगी या नहीं... ये एक बड़ा सवाल है.... हर कोई ये जानने को बेकरार है कि....आखिर बिहार के मतदाता किस ओर करवट लेंगे.... लोकसभा में परचम लहराने वाली बीजेपी के हौसले बुलंद है.... लेकिन नीतीश की लोकप्रियता का तकाजा भी बीजेपी को बखूबी है..... बीजेपी को  ये पता है कि.... 2010 के चुनाव में.... नीतीश ही बहुमत के फैक्टर थे.... नीतीश के नाम पर ही जेडीयू और बीजेपी को वोट मिले थे.... लेकिन वक्त बदल चुका है.... आज दुश्मन दोस्त है.... और दोस्त दुश्मन.... बीजेपी के पास पीएम मोदी का चेहरा है.... तो वही नीतीश कुमार के पास... लालू और राहुल गांधी है....हालात बदल चुके है....परिस्थितिया बदल चुकी है....मोहरे बदल चुके है.... सबकी निगाहे.... बस इस बात पर टिकी है.... कि कौन किसे मात देता है.... तमाम न्यूज चैनल सर्वे करा रहा है.... कोई एनडीए को बहुमत दे रहा है.... को नीतीश को लेकप्रिय सीएम बता रहा है.... लेकिन इन सब के बीच.... बिहार की जनता.... खामोश है... शांत है.... और इंतजार में है.... मतदान करने के लिए बेताब है....किसे वोट देना है.... और किसे नहीं देना है.... जनता ने ये तय कर लिया है.... लेकिन इस चुनाव में रणनीति का हिस्सा खुद जनता भी है.... जनता अपने अधिकार को समझती है.... इसलिए वो सबको सुन रही है.... सबकी रैलियों में जा रही है.... और राजनीतिक पार्टियों के सियासत को समझ रही है.,.... 2010 के चुनाव में बिहार के 53 फीसदी मतदाता नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते थे..... लेकिन उनके गठबंधन को इस अनुपात में मत नहीं मिला था.....उस वक्त जेडीयू-बीजेपी गठबंधन को कुल पड़े मतों का 39 फ़ीसदी मत मिला था..... ..ऐसे में तय है कि उनके नाम पर कम लोग गठबंधन को वोट देंगे....नीतीश को इस बार 47 फीसदी लोग बिहार के मुख्यमंत्री के रुप में देखना चाहते है..... नीतीश की लोकप्रियता में 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.... लेकिन बावजूद इसके नीतीश कुमार.... बिहार मुख्यमंत्री के रेस में बिहार की जनता की पह्ली पसंद है.... और उनकी ताकत को मजबूती देने के लिए... आरजेडी और कांग्रेस भी साथं में है.....ऐसे में इस चुनाव में आकलन करना की.... कौन जीतेगा.... और किसकी हार होगी.... कतई आसान नहीं है....