आपकी ऐसी लाइफस्टाइल आपको बना सकती है बाँझ

infertility यानि के बाँझपन और कोई नहीं चाहता है कि उसके बच्चे नहीं हो हालाँकि यह मुद्दा जितना स्वास्थ्य से जुड़ा है उस से भी कंही अधिक जुड़ा है हमारे सामाजिक ताने बाने से क्योंकि जन्हा कई लोग या महिलाएं अपने करियर को लेकर देरी से माँ बनने को prefer करती है जबकि late pregnancy के अपने खतरे है | वन्ही सामाजिक ताने बाने को लेकर यह डर के साथ यह धारणा होती है कि बच्चे नहीं हुए तो ‘लोग क्या कहेंगे’ या फिर अगर बच्चे नहीं हुए तो ‘वारिस कौन होगा ‘ | जब यह सवाल केवल निचले दर्जे की सोच से ही पनपते है आप बच्चा गोद ले सकते है और दूसरे और विकल्प भी है जिन पर बात की जाये तो बहस लम्बी होती जाती है तो चलिए बात करते है infertility treatment in hindi विषय पर जिस पर चर्चा जरुरी है –

 

infertility से चूँकि कोई जान को बड़ा खतरा नहीं है इसलिए इसे उस नजरिये से नहीं देखा जाता है जैसे किसी बीमारी को देखा जाता है जबकि यह और बात है कि बीते जमाने में जब जागरूकता नहीं थी बच्चे नहीं होने का दोष केवल महिलाओं के सिर पर मढ़ दिया जाता था | खैर शुक्र है अब पहले जैसा नहीं है क्योंकि लोग जानते है infertility में महिला और पुरुष के साथ समस्या दोनों तरफ से ‘50-50’ प्रतिशत हो सकती है | लेकिन फिर भी है तो यह एक समस्या ही |

कैसे निर्धारण होता है infertility का – medical world के अनुसार ‘ अगर कोई कपल बिना किसी गर्भनिरोधक के दो साल या इस से भी अधिक समस्या तक शारीरिक सम्बन्ध बना रहा है और उसके बाद भी pregnancy नहीं होती है तो इसमें से महिला या पुरुष दोनों में से किसी एक के साथ infertility की समस्या हो सकती है |